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मेरा विश्वास

Posted On: 30 Jan, 2018 कविता में

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असफल हूँ में अब तक क्योकि,
कुछ कमजोरियाँ हैं मुझमें|
चाह कर भी जिनका परित्याग
नहीं हो पाता हैं मुझसे||


जीवन की चालबाजियाँ,
जंचती नहीं हैं मुझको|
लोगो की चाप्लूसियाँ,
फबती नहीं हैं मुझको ||


लोगों की “जी हज़ूरी” का,
रोम-रोम विरोध करता हैं|
“अपनी मेहनत पर भरोसा रख”
यही अनुरोध करता हैं||


किसी को गिरा कर,
खुद को उठा लूँ कैसे |
किसी को गलत करते देख,
उसकी हाँ में हाँ मिला लूँ कैसे ||


और विडम्बना तो देखो,
इन कमज़ोरियों पर गर्व भी है मुझको|
विरासत में मिले इन संस्कारो पर,
मान भी है मुझको||


पर निःशक्त न समझना,
मेरे साथ मेरा अटूट प्रयास है|
इन संस्कारो क साथ ही सफलता मिलेगी,
ऐसा मेरा विश्वास हैं||

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